केकड़ी, 26 सितंबर 2024- केकड़ी के राजकीय जिला चिकित्सालय में इस समय अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। मरीजों की देखभाल और इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह हालात सिर्फ अस्पताल के बुनियादी ढांचे की कमी का परिणाम नहीं हैं बल्कि एक सुनियोजित तानाशाही रवैया और प्रशासनिक अराजकता का परिणाम हैं। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल को अपनी व्यक्तिगत जागीर बना लिया है जहां वे अपनी मनमानी से नियम बना रहे हैं और तोड़ रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि चिकित्सालय में हर दिन मरीजों और डॉक्टरों को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ता है। राजकीय जिला चिकित्सालय केकड़ी में चिकित्सा अधिकारियों और मरीजों के बीच अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पर तानाशाही और मनमानी का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों ने जिला कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा है।


मनमानी एवं तानाशाही व्यवहार: शिकायत के अनुसार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी द्वारा मनमानी तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिससे अन्य चिकित्सकों और मरीजों के बीच गलतफहमियां फैल रही हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के होते हुए भी उनकी जानकारी को गलत साबित कर, मरीजों को बाहरी जाँचों और दवाइयों की अनावश्यक सलाह दी जा रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

चिकित्सकों के कक्षों में लगातार बदलाव: अस्पताल में चिकित्सकों के कक्षों को बार-बार बदला जा रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कक्षों के लगातार बदलने से मरीजों को सही जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।

महत्वपूर्ण सूचनाओं का समय पर ना मिलना: जिला प्रशासन द्वारा आयोजित दिव्यांग कैम्प की सूचनाएं अंतिम समय पर दी जाती हैं, जिसके कारण कई बार मरीजों के पहले से निर्धारित ऑपरेशन स्थगित करने पड़ते हैं। इसका सीधा असर मरीजों की सेहत पर पड़ता है, और उन्हें बिना किसी कारण भूखा-प्यासा रहना पड़ता है।

ऑपरेशन थियेटर और ICU में हस्तक्षेप: प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पर आरोप है कि वह ऑपरेशन थियेटर और गहन चिकित्सा इकाई में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं। ICU को व्यक्तिगत उपयोग के लिए जनरल वार्ड की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे गंभीर मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिल पाती और उन्हें अन्यत्र रेफर करना पड़ता है।

लेबर रूम में बिना विशेषज्ञ के हस्तक्षेप: PMO द्वारा लेबर-रूम में जाकर बिना विशेषज्ञ के गर्भवती महिलाओं के इलाज प्रसव कराये जाते है। जो के अपने आप मे ही एक अति-गंभीर विषय है।

मरीजों और डॉक्टरों में असंतोष:

इस स्थिति ने अस्पताल के डॉक्टरों और मरीजों दोनों में ही असंतोष पैदा कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की तानाशाही रवैये के कारण अस्पताल का वातावरण बिगड़ गया है और इसका सीधा प्रभाव मरीजों की सेवा और उपचार पर पड़ रहा है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग:

डॉक्टरों ने जिला कलेक्टर से इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्यवाही करने की मांग की है, ताकि अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। डॉ. मानसिंह बेरवा, डॉ. रोहित पारीक, डॉ. मुनेश गॉड, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. अनूप कुमार और डॉ. लोकेश मीणा सहित अन्य डॉक्टरों ने जिला कलेक्टर को प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की कार्यशैली और अस्पताल की अव्यवस्थाओं के संबंध में ज्ञापन सौंपा।

PMO का पक्ष: प्रमुख चिकित्सा अधिकारी से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने किसी भी टिप्पणी से इनकार कर दिया।