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संसार के दुख-सुख का हल आत्मशोध में है- मुनि अनुपम सागर महाराज
मानव प्रेम और मोह के मायाजाल में इतना आसक्त हो जाता है कि इससे होने वाले परिणामों को समझ नहीं पाता । हवस वासना इतनी खतरनाक है कि इसके प्रति आसक्त 
Govind Vaishnav
Chief Editor
Nov 16, 2024 • 7:20 AM IST
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मानव प्रेम और मोह के मायाजाल में इतना आसक्त हो जाता है कि इससे होने वाले परिणामों को समझ नहीं पाता । हवस वासना इतनी खतरनाक है कि इसके प्रति आसक्त हो जाने पर जन्मदाता परिवार के संस्कारों धर्म के प्रति साधु संगति का उसके ऊपर कोई असर नहीं होता वह सभी मर्यादा लांघकर गलत रास्ते पर चल पड़ता है । कितनी बार आत्म शोध कर लिया लेकिन कभी सत्यार्थ बोध को प्राप्त नहीं कर पाए । भक्ति ऐसी करें कि प्रभु चरणों में सिद्ध तत्व को प्राप्त कर ले । मन को ऐसा बनाएं की किसी के प्रति मन न बनाना पड़े । जैसा भाव बनाएंगे वैसी ही भावना बन पाती है । दुख और सुख भी संसार में ही है लेकिन अपनी दृष्टि का अवलोकन करना पड़ेगा अपने किए गए कर्मों को स्वयं ही भोगना पड़ता है अन्य कोई भी कर्मों को नहीं भोगेगा। इसलिए कर्म ऐसे करें कि जीवन में यश कीर्ति संबल मिल जाए और अपनी आत्मा को आत्म कल्याण की ओर ले जाए जिससे कि मोक्ष की राहों पर चल सके। घंटाघर स्थित आदिनाथ मंदिर में आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल एवं सत्यार्थ बोध पावन वर्षा योग के समापन पर धर्म सभा में मुनि अनुपम सागर महाराज ने धर्मोपदेश में कहीं।

मीडिया प्रभारी रमेश जैन ने बताया कि सिद्ध चक्र मंडल विधान के समापन पर पूर्णाहुति एवं विश्व शांति कामना यज्ञ की पूर्णाहुति की गई। श्री जिन मंदिर के शिखर पर सकल जैन समाज द्वारा धर्म ध्वज पताका लहराई गई । दिलीप जैन ने बताया कि मध्यान्ह में मुनि ससंघ के सानिध्य में देवगांव गेट स्थित गौशाला सत्संग भवन में दंपति संस्कार शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें नवविवाहित से लेकर 60 वर्ष के विवाहित 100 दम्पतियों को राष्ट्र धर्म और परिवार के प्रति संस्कारित होने का मंत्र दिया गया। समाज के मंत्री के.सी. जैन ने बताया कि 17 नवंबर शनिवार को मध्यान्ह 1ः00 बजे सत्यार्थ बोध पावन वर्षा योग के समापन समारोह के अंतर्गत मुनि ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन का भव्य कार्यक्रम घंटाघर पर आयोजित किया जाएगा ।
दंपति संस्कार में आचार्य के चित्र अनावरण प्रवीण मित्तल जयपुर, विनोद कुमार सलेहा एवं दीप प्रज्जवलन मनोज कुमार, विनय कुमार एवं शास्त्र भेंट ज्ञानचंद, टीकमचंद, रमेश चंद, अनिल कुमार बंसल ने प्राप्त किया । कार्यक्रम में सूरत, उदयपुर, जयपुर, भीलवाड़ा, निवाई, विजयनगर, देवली, सलेहा आदि स्थानों से पधारे श्रावकों ने भाग लिया । कार्यक्रम का संचालन आशोतोष शास्त्री आगरा द्वारा किया गया ।
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