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सुरेंद्र दुबे स्मृति सम्मान में भव्य कवि सम्मेलन संपन्न: कवियों ने बांधा समां
केकड़ी में पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,केकड़ी में बुधवार शाम एक भव्य कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दि
Govind Vaishnav
Chief Editor
Jun 19, 2025 • 7:25 AM IST
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केकड़ी में पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,केकड़ी में बुधवार शाम एक भव्य कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सचिव डॉ. अविनाश दुबे ने बताया कि इस विश्व विख्यात हास्य कवि एवं संवेदनशील गीतकार सुरेंद्र दुबे स्मृति सम्मान में देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी कविताओं से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित जनसमूह देर रात तक कविताओं के रस में डूबा रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक केकड़ी, लालाराम बैरवा विधायक शाहपुरा, एम एल डी संस्थान के सचिव चंद्र प्रकाश दुबे, हरिओम पवार, विष्णु सक्सेना, कीर्ति काले, कैलाश मंडेला, दीपक शुक्ला, दिनेश बंटी, चंद्रशेखर भंडारी, होनहार सिंह राठौड़,कमलेश साहू ,सुभाष हेमानी द्वारा द्वीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। संयोजक श्री सुरेंद्र दुबे स्मृति संस्थान केकड़ी ने अतिथियों और कवियों का स्वागत किया और कवि सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। इस उपलक्ष पर आयोजन समिति की ओर से हरिओम पवार और डॉ विष्णु सक्सेना दोनों कवियों को अलग-अलग एक लाख ग्यारह हजार एक सो ग्यारह रुपये राशि चैक , ताम्रपत्र, श्रीफल, शोल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

साथ ही विधायक केकड़ी का कोहिनूर व लालाराम बैरवा को केकड़ी रत्न, सुरेंद्र जोशी को ब्रह्म रत्न, बृजराज शर्मा को विज्ञान रत्न के ताम्रपत्र, शोल ,श्री फल और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया श्रोताओं ने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की इस अवसर पर वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय वीर रस कवि हरिओम पवार,अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ लोकप्रिय गीतकार डॉ विष्णु सक्सेना, अंतर्राष्ट्रीय कवयित्री एवं मंच संचालिका डॉ कीर्ति काले, केंद्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित कवि एवं पैरोडीकार डॉक्टर कैलाश मंडेला, हास्य कवि एवं गीतकार दीपक शुक्ला दनादन और दिनेश बंटी जैसे दिग्गज कवियों ने अपनी ओजस्वी वाणी में ऑपरेशन सिंदूर,वीर रस, श्रृंगार रस, हास्य रस और सामाजिक चेतना पर आधारित कविताओं का पाठ किया। हरिओम पवार ने काव्य पाठ के माध्यम से कवि सम्मेलन को ऊंचाइयां प्रदान करते हुए हिंदी कवि सम्मेलनों में ओज के शिखर पुरुष डॉ हरिओम पंवार ने आपरेशन सिन्दूर सहित अनेक ज्वलंत विषयों पर अपनी ओजस्वी वाणी में रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश भर दिया। ,डॉ विष्णु सक्सेना ने अपने काव्य पाठ में चाँदनी रात में रंग ले हाथ में सारी दुनिया को हम छोड़ तुम हमारी कसम तोड़ दो हम तुम्हारी कसम तोड़ दें हल्दीघाटी युद्ध की तिथि के परिप्रेक्ष्य में अपनी लोक प्रसिद्ध रचना "धोयो माथे लाग्योड़ा दाग़ ने, हिंदवाणी सूरज ऊंची राखी मेवाड़ी पाग ने" का पाठ कर श्रोताओं को रोमांचित कर भरपूर तालियां बटोरी। उनकी कविताओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाह कर खूब दाद दी। विधायक ने इस अवसर पर घोषणा करते हुए कहा कि श्री सुरेंद्र दुबे स्मृति संस्थान केकड़ी शहर में किसी भी चौराहे, सड़क अथवा सामुदायिक भवन का नामकरण स्वर्गीय कवि सुरेंद्र दुबे के नाम पर करने हेतु प्रस्ताव भेजें। नगर परिषद केकड़ी द्वारा शीघ्र उस प्रस्ताव को पारित कर स्व. सुरेन्द्र दुबे की स्मृति को चिरस्थाई बनाया जाएगा। विधायक ने तेजा मेले में दो कवि सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा करते हुए कहा कि इसमें दुबे स्मृति कवि सम्मेलन में आमंत्रित सभी कवियों को आमंत्रित किया जाएगा। कवयित्री डॉ कीर्ति काले ने अपनी ओजस्वी वाणी के माध्यम से पहलगाम में आतंकी आए तो फिर आए कैसे हुई सुरक्षा में गलती काले बादल छाए कैसे बहनों के सिन्दूर पोंछकर गए तो आखिर कहाँ गए आसमान खा गया उन्हें या फिर धरती में समा गए उन्हें पकड़कर लाने का संकल्प हमारा है। क्या सिंहों का देश कभी चूहों से हारा है से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। दीपक शुक्ला "दनादन"ने काव्य पाठ में सुनाया की उत्सव ये स्वाधीन दिवस के केवल एक छलावा है कैसी ये आज़ादी पाई जीवन भर पछतावा है ,ये आज़ादी इंसानों में मजहब की दीवार बनी ,ये आज़ादी खून बहाती आतंकी हथियार बनी ,ये आज़ादी नारी की लूटती अस्मत से रोती है ये आज़ादी फुटपाथों पर भूखी नंगी सोती है। दिनेश बंटी , शाहपुरा ने दादाजी के स्वर्गवास पर सांत्वना देने आने वाले लोगों पर उठावना शीर्षक से हास्य रचना एवं कई चुटिल बातों पर खूब हंसाया। रणवीर सिंह सोढी ने आयोजन में आए हुए सभी कविगण अतिथियों का साफा व माला पहनाकर स्वागत किया तथा संस्थान के चित्रकला शिक्षक के रूप में सभी अलंकृत कवियों के स्केच बनाकर भेंट किए गए । डॉ.अविनाश दुबे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। रात तीन बजे तक चले इस सफल आयोजन ने निश्चय ही इतिहास रचा है जो लंबे समय तक याद रहेगा। आज सुरेन्द्र दुबे जी के जन्म दिवस पर उनकी स्मृतियों को सादर नमन।


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