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श्री आदिनाथ मंदिर में मुनि अनुपम सागर महाराज ने दिया मोक्ष मार्ग पर समता भाव और सत्यार्थ बोध का संदेश
केकड़ी- आत्म स्वरूप की पहचान करते हुए परमात्मा के निकट पहुंचकर समाधि को प्राप्त करने के लिए समता भाव रखना जरूरी है । सत्यार्थ का बोध होने पर मोक्ष मार्ग की
Govind Vaishnav
Chief Editor
Oct 24, 2024 • 7:16 AM IST
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केकड़ी- आत्म स्वरूप की पहचान करते हुए परमात्मा के निकट पहुंचकर समाधि को प्राप्त करने के लिए समता भाव रखना जरूरी है । सत्यार्थ का बोध होने पर मोक्ष मार्ग की और अग्रसर होने दीक्षार्थियों को देखकर चमत्कार को प्राप्त कर सकते हैं और भावों से निर्मलता पा सकते हैं । निश्चित रूप से हम जान रहे हैं कि यह शरीर मेरा नहीं है इस सत्य को जानकर भी सांसारिक मोह माया को नहीं छोड़ पाए । देव शास्त्र गुरु की तो हम मानते हैं लेकिन इनकी बातों को हम नहीं मानते हैं । समय पर किया हुआ काम ही हमें समय पर पहुंचाता है । संतों के साथ और शांति के साथ जीने का आनंद प्राप्त कर सकते हैं श्वास से सभी जीते हैं लेकिन विश्वास से जीतने वाले महानता को प्राप्त करते हैं ।घंटाघर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में आयोजित सत्यार्थ बोध पावन वर्षा योग के अवसर पर आयोजित धर्म सभा पर मुनिश्री अनुपम सागर महाराज ने अपने धर्मोपदेश में कही।

धर्म सभा में मुनि यतीन्द्र सागर महाराज ने कहा की शक्ति का कभी भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमेशा शक्ति का सदुपयोग कार्य में लगाना चाहिए । शरीर का जैसा प्रयोग करोगे वैसा ही फल की प्राप्ति कर पाओगे । इंद्रियां शिथिल हो उसके पूर्व सत्य समझते हुए आत्म कल्याण का मार्ग प्रस्तुत कर लेना चाहिए । जब जागो तभी सवेरा है ।वर्षा योग समिति अध्यक्ष ओम मित्तल ने बताया कि मुनि ससंघ के अल्प प्रवास अजमेर रोड शांतिनाथ मंदिर से जुलूस के साथ चातृर्मास स्थल श्री आदिनाथ मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ ।समाज के महावीर मित्तल ने बताया कि आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज से दीक्षा ग्रहण करने से पूर्व श्री आदिनाथ मंदिर में दीक्षार्थियों की हल्दी, मेहंदी का कार्यक्रम हुआ एवं शाम को दीक्षार्थियों की गोद भराई की गई एवं बग्गी में जुलुस के साथ बिन्दौरी निकाली गई जो पाश्र्वनाथ मंदिर, चन्द्रप्रभु चैत्यालय, ऋषभदेव मंदिर, नेमिनाथ मंदिर में दीक्षार्थियों की गोद भराई धार्मिक कार्यक्रम के साथ सम्मपन्न हुई। मीडिया प्रभारी रमेश जैन ने बताया कि आचार्य के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन , पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चारों दीक्षार्थियों द्वारा एवं ओमप्रकाश, विनोदकुमार, प्रिन्स मित्तल देवगांव वालों को प्राप्त हुआ।धर्मसभा का संचालन ब्रह्मचारी अक्षय भैया गुरूग्राम वालों ने किया। दिलीप जैन ने बताया की मुनि ससंघ द्वारा प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे धर्मसभा का संचालन श्री आदिनाथ मंदिर में होगा।

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