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मृत्यु एक अटल सत्य: देह मोह और सत्य बोध पर मुनि अनुपम सागर महाराज के प्रेरक प्रवचन
केकड़ी- अगरबत्ती को जलाने पर वह सर्वत्र सुगंध कर देती है और सभी का मन प्रसन्न चित्र हो जाता है और यही अगरबत्ती पूरी जल जाने पर राख बन जाती है ओर उसे झाड़ू स
Govind Vaishnav
Chief Editor
Sep 28, 2024 • 6:45 AM IST
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केकड़ी- अगरबत्ती को जलाने पर वह सर्वत्र सुगंध कर देती है और सभी का मन प्रसन्न चित्र हो जाता है और यही अगरबत्ती पूरी जल जाने पर राख बन जाती है ओर उसे झाड़ू से साफ करके बाहर फेंक दिया जाता है । इसी प्रकार हमें अपनी देह के प्रति इतनी आसक्ति रहती है कि इस सजाने संवारने में कोई कमी नहीं रखते हैं और मृत्यु आ जाने पर इस शरीर को जलाकर राख कर दिया जाता है और राख को नदी में बहा दिया जाता है । मृत्यु निश्चित है,हम अपने लक्ष्य तक पहुंच पाए या नहीं लेकिन मृत्यु का लक्ष्य निश्चित है। प्राणी मात्र की मृत्यु हो जाने पर इस शरीर को छोड़ना ही पड़ता है यह जीवन एक किराए का मकान है ।सत्यार्थ बोध इस माध्यम से सत्य को उजागर करता है । बोहेरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर में सत्यार्थ बोध पावन वर्षा योग के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में "मोत के तूफान" पर मुनि अनुपम सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे।

धर्म सभा में मुनि यतींद्र सागर महाराज ने कहा कि किसी भी चित्र को देखने मात्र से मन विचलित हो जाता है। जिन बिम्ब के दर्शन करने से मन मे वीतरागता के अच्छे भाव आ जाते हैं और विषयों, कसायों, संकल्प ,विकल्प के प्रति निर्मलता के भाव आ जाते है । इसी प्रकार गलत चित्र पर दृष्टि जाने मात्र से परिणाम में विकृति आ जाती है,अतः अपने मन मे अच्छे विकल्प रखने चाहिए। प्रातः जिनाभिषेक, शांति धारा ,दैनिक पूजा सहित धार्मिक कार्यक्रम मुनि ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुए। शाम को आरती, भक्ति, प्रश्नोत्तरी सहित मुनि संघ द्वारा धर्म वाचना के कार्यक्रम आयोजित किए गए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि रविवार 29 तारीख को 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान के मंदिर के 22 वर्ष पूर्ण होने पर बोहरा कॉलोनी स्थित जिनायल में स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर 1008 कलशों से भगवान नेमिनाथ का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। दिन में नेमिनाथ विधान व शाम को 1008 दीपकों से भगवान की महाआरती की जाएगी।

आचार्य श्री को चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान भगत परिवार तथा महावीर प्रसाद,अशोक कुमार, पंकज कुमार, पंवालिया परिवार ने प्राप्त किया। चंद्रकला जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत कियाधर्म सभा का संचालन अशोक सिंघल ने किया ।



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