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बारिश के बाद भी बीसलपुर बांध में घट रहा पानी, मात्र 29.12% बचा जल, बढ़ने लगी चिंता
बीसलपुर बांध में सावन के महीने में भी पानी की कमी जारी है, जिससे जयपुर, अजमेर और टोंक सहित कई शहरों में पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। बांध की भराव क्षम
Govind Vaishnav
Chief Editor
Jul 25, 2024 • 6:43 AM IST
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बीसलपुर बांध में सावन के महीने में भी पानी की कमी जारी है, जिससे जयपुर, अजमेर और टोंक सहित कई शहरों में पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। बांध की भराव क्षमता 315 आरएल मीटर और 38.5 टीएमसी है, लेकिन वर्तमान में यह केवल 29.12% पानी ही शेष है। बीसलपुर बांध में पानी का स्तर घटकर 310.17 मीटर हो गया है। कुल भंडारण क्षमता का 29.12% ही पानी शेष है, जो 11.269 टीएमसी के बराबर है। आज कोई बारिश नहीं हुई है और कुल वर्षा 458 मिमी दर्ज की गई है। त्रिवेणी से पानी की आवक नहीं हो रही है।

पानी की स्थिति: बीसलपुर बांध में रोजाना 2 सेंटीमीटर पानी घट रहा है। टोंक जिले में इस साल 346.46 मिमी बारिश हुई है, लेकिन राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अजमेर क्षेत्र से बांध में पानी की आवक नहीं हुई है। त्रिवेणी और डाई नदियों से भी अब तक पानी की आवक नहीं हुई है, जो बड़ी चिंता का विषय है।
जल स्तर में गिरावट: पिछले तीन दिनों में बांध का जल स्तर 7 सेंटीमीटर कम हुआ है। रविवार को जल स्तर 310.24 मीटर था, जो गुरुवार को को घटकर 310.17 मीटर रह गया है। वर्तमान में जयपुर, अजमेर और टोंक को 1 हजार एमएलडी पानी प्रतिदिन बांध से सप्लाई किया जा रहा है।
जलग्रहण क्षेत्र की समस्या:बांध के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले 20 सालों में बहकर आई बजरी और गाद से इसकी स्टोरेज क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। ऐसे में बांध पर निर्भरता कब तक बनी रहेगी, कहा नहीं जा सकता। उम्मीदें अब केवल मॉनसून की बारिश पर टिकी हैं।
भविष्य की संभावना: अगर अच्छी बरसात होती है, तो बांध फिर से भर सकता है। टोंक में बनास नदी पर बना यह बांध, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अजमेर के पानी से भरता है। इस बार भीलवाड़ा की त्रिवेणी संगम पर बनास का गेज 0 दर्ज है, जो चिंता का विषय है। फिलहाल इन जिलों में तालाब और एनीकट भी खाली हैं, जो बारिश के बाद भरेंगे और पानी की आवक बांध तक होगी।
इतिहास: बीसलपुर बांध अब तक 6 बार ओवरफ्लो हो चुका है। पहली बार 2004 में और उसके बाद 2006, 2014, 2016, 2019 और 2022 में यह पूरी तरह भर गया था। 2019 में सबसे ज्यादा 18 गेटों को एक साथ खोलकर पानी की निकासी की गई थी।
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