बघेरा 18 सितंबर- बघेरा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों चिकित्सा सेवाओं की बदहाली के चलते सुर्खियों में है। यहां पर मौजूदा हालात इतने खराब हो चुके हैं कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति और नर्सिंगकर्मियों की मनमानी के चलते मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र पर तीन डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन उनमें से कोई भी नियमित रूप से मरीजों का उपचार नहीं कर रहा। एक डॉक्टर केकड़ी में बीसीएमओ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर है, जबकि एक डॉक्टर पिछले तीन-चार महीनों से गायब है। नतीजतन, मरीजों को देखने और दवाइयां लिखने का काम नर्सिंगकर्मियों पर छोड़ दिया गया है।

डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों की अनुपस्थिति से गंभीर समस्या-इस केंद्र पर डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी का असर सीधा मरीजों पर पड़ रहा है। मौसमी बीमारियों के चलते यहां मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों की अनियमितता और मनमानी से उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल तीन डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी एक डॉक्टर को प्रतिनियुक्ति पर केकड़ी भेजा गया है और एक डॉक्टर कई महीनों से गायब हैं।

नर्सिंगकर्मियों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। छह नर्सिंगकर्मियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक को सरवाड़ अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। मरीजों का कहना है कि इस स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और नर्सिंगकर्मियों के बीच तालमेल की कमी के चलते उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

जांच मशीनें भी खराब, मरीजों को हो रहा आर्थिक नुकसान-मरीजों की मुश्किलें सिर्फ डॉक्टरों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं हैं। यहां जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी खराब पड़ी हैं, जिसके चलते मरीजों को केकड़ी जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी होता है।

चिकित्सा केंद्र बना राजनीति का अखाड़ा-स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है। यहां काम करने वाले चिकित्सा कर्मी अपने निजी हितों और राजनीतिक दबावों के चलते सही समय पर अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों को यहां इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

बीसीएमओ का बयान-बीसीएमओ संजय कुमार शर्मा ने बताया कि उन्हें केकड़ी में बीसीएमओ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है। एक डॉक्टर पिछले तीन-चार महीनों से गायब है, जबकि एक डॉक्टर ही यहां कार्यरत है। नर्सिंगकर्मी को सरवाड़ अस्पताल में भेजा गया था, लेकिन अब उसकी प्रतिनियुक्ति निरस्त कर दी गई है और उसे वापस बघेरा केंद्र पर ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, जांच मशीनों में आई तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है और जल्द ही मशीनें ठीक कर दी जाएंगी।

सवालों के घेरे में चिकित्सा सेवाएं-इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कैसे यहां के ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों की अनियमितता, जांच मशीनों की खराबी और स्वास्थ्य केंद्र की राजनीति से मरीजों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जिले का सीएमएचओ से कई बात दूरभाष पर बात करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया।