केकड़ी। बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दसलक्षण महापर्व के अंतर्गत गुरुवार को आठवां दिन ‘उत्तम त्याग धर्म’ के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। प्रतिदिन की भांति संगीतमय शांतिधारा, नित्यनियम पूजा और अभिषेक का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्री नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा का पुण्यार्जन दिनेश कुमार प्रकाश चंद जैन (नासिरदा परिवार) तथा विमल चंद राजेंद्र कुमार रमेश चंद जैन (मेहरू कला परिवार) ने किया।


समाज अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स ने बताया कि शांतिधारा के पश्चात दसलक्षण धर्म महाविधान में आज 11 श्रीफल अर्घ्य समर्पित किए गए। पंडित निकेत शास्त्री ने अपने प्रवचन में “उत्तम त्याग धर्म” का महत्व बताते हुए कहा कि त्याग जीवन को संतोषी और संयमित बनाता है। त्याग से न केवल उत्तम कर्मों की वृद्धि होती है, बल्कि पाप कर्मों का नाश भी होता है। उन्होंने जैन मुनि का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा त्याग वही है, जिसमें व्यक्ति धन, परिवार और यहां तक कि वस्त्रों का भी त्याग कर जीवन पर्यंत दिगंबर मुद्रा धारण करता है।

सांयकालीन कार्यक्रम

मीडिया प्रभारी पारस जैन ने बताया कि सांयकालीन सामयिक प्रतिक्रमण के पश्चात समाज के 12 परिवारों द्वारा अपने मोहल्लों से संगीतमय महाआरती का जुलूस निकालकर मंदिर में भव्य महाआरती की गई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

 पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने “षट्-द्रव्य नाटिका” का मंचन कर सभी का मन मोह लिया। नाटिका में निकेत भैया, टीना, अलका, सरस्वती, चंद्रकांता, अरुणा बंसल व लक्ष्मी जैन ने सहयोग किया। सभी प्रतिभागियों को पवन कुमार–पारस कुमार (जैन मोबाइल्स) एवं भागचंद जैन–कुमार भगत की ओर से पुरस्कृत किया गया।