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धन नहीं, आत्मा की शुद्धि ही सच्चा धर्म- निर्पुण नंदी महाराज
केकड़ी- परिग्रह, आसक्ति, राग, मोह के कारण मानव धन संचय के प्रति निरंतर संलग्न है और हर वस्तु स्वयं की मान रहा है आत्म कल्याण के प्रति दृष्टि नहीं है परिग्रह
Govind Vaishnav
Chief Editor
May 01, 2025 • 7:43 AM IST
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केकड़ी- परिग्रह, आसक्ति, राग, मोह के कारण मानव धन संचय के प्रति निरंतर संलग्न है और हर वस्तु स्वयं की मान रहा है आत्म कल्याण के प्रति दृष्टि नहीं है परिग्रह के प्रति मूच्र्छा भाव बनाए हुए हैं। बोहरा काॅलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित श्री कल्पद्रूम महामंडल विधान के अंतर्गत आयोजित धर्म सभा में बालाचार्य निर्पुण नंदी महाराज ने धर्म श्रद्धालुओं को धर्म सभा में कहे । धर्म सभा में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि सैनिक और साधु संत कभी मौत के भय में नहीं रहते हैं सैनिक देश की रक्षा के लिए, संत मानव जीवन आत्म कल्याण , स्व आत्म कल्याण की भक्ति करने के प्रति डरते नहीं है । आत्मा के प्रति श्रद्धा ना होने पर वास्तविक धर्म की पहचान नहीं कर पाते और नहीं कल्याण कर सकते हैं । आत्मा अजर अमर अविनाशी है इसके स्वरूप को जानकर आत्म बल महसूस कर सकते हैं । स्व की स्व कृपा से परमात्मा के द्वार पर जा सकते हैं खुद को सताने पर दूसरों को भी सताया जाता है । काया के प्रति मोह को छोड़कर कायोत्सर्ग के माध्यम से आत्म कल्याण करें । क्षमा भी अपने आप से मांगे तत्पश्चात दूसरों से क्षमा मांगे । दिगंबर साधु सर्वोच्च तज कर सुखा अनुभव करते हैं।

प्रातः जिनाभिषेक, शांति धारा, जिनेंद्र अर्चना एवं धार्मिक क्रियाएं श्री नेमीनाथ मंदिर में आचार्य इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुई । विधान स्थल में स्थित श्री जी के समवशरण में चतुर्विध दिशा में विराजमान श्री जी का जिनाभिषेक एवं शांति धारा आचार्य इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में की गई ,जिसके पूण्यार्जक भागचंद, ज्ञानचंद, सुनील कुमार धून्धरी वाले परिवार रहे ।समाज के अमरचंद चैरूका ने बताया कि आचार्य श्री के पादप्रक्षालन करने का सौभाग्य शांतिलाल, पारस कुमार, विनोद कुमार, राकेश कुमार, जूनियां परिवार ने प्राप्त किया । विधान प्रारंभ करने से पूर्व मंडल के विधान कलश, अष्ट प्रतिहार्य एवं कलश महिलाओं द्वारा धार्मिक क्रियायों के साथ विधानाचार्य के निर्देशन में विराजमान किए गए । आचार्य इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल जैन शास्त्री के निर्देशन में मस संगीत एवं साज बाज के साथ श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के 65 अघ्र्य श्रीफल सहित श्रीजी को समर्पित किए गए ।

समाज के सुरेन्द्र रांटा ने बताया कि शाम को महा आरती टीकम चंद, धनप्रकाश, मनोज, सुबोध सोगानी परिवार के निज आवास से मय बैंड बाजे के साथ विधान स्थल पर पहुंचेगी । फिर आरती भक्ति एवं आनंद यात्रा प्रश्नोत्तरी सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे धर्म सभा का संचालन कपिल भैया द्वारा किया गया।
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