केकड़ी- आज दशलक्षण महापर्व का अन्तिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। आत्मा में लीन हो जाना और आत्मा में रमन करना ब्रह्मचर्य व्रत है। ब्रह्म रूप शुद्ध आत्मा में स्थिर होना ब्रह्मचर्य है । ब्रह्मचर्य का पालन करने से मन प्रसन्न रहता है बुद्धि तीव्र होती है। मन बलवान होता है। व्रत का राजा ब्रह्मचर्य व्रत है। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन में चल रहे जिन सहस्त्र नाम विधान में प्रवचन में युवा मनीषी पण्डित मनोज जैन शास्त्री ने कहे। 


श्री आदिनाथ मंदिर में मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य  श्री महावीरप्रसादजी, रमेशचन्दजी, धर्मचन्दजी, सन्तकुमार, टीकमचंद, मोनूकुमार मित्तल (पीटी) परिवार रामथला वाले एवं श्रीमती जसोदादेवी, अशोककुमार, धनेशकुमार,यशकुमार, गौत्तम, रौनक एवं समस्त सिंहल परिवार छाबड़िया वालों ने प्राप्त किया एवं मंदिर में विराजमान सभी 77 जिन प्रतिमाओं का 90 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भव्य आकर्षण के साथ अभिषेक एवं शांति धारा युवा मनीषी पण्डित मनोज जैन शास्त्री के निर्देशन में की गई एवं 12वें तीर्थंकर वासु पूज्य भगवान के मोक्ष कल्याण का मोदक सहित मोक्ष कल्याणक मनाया गया।


शांतिधारा संयोजक कमलेश जैन ने बताया कि दोपहर में सभी मन्दिरों में अनंत चतुर्दशी के कलाशाभिषेक हुये एवं शाम को 108 दीपकों द्वारा श्रीजी की संगीतमय धुन के साथ आरती की गई। क्षमावाणी पर्व सोमवार को सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा मनाया जाएगा।