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झूठे दस्तावेज बनाकर न्यायालय को गुमराह करने का मामला, तत्कालीन थानाधिकारी धोलाराम और कांस्टेबल पर कूटरचना का आरोप, एसीजेएम प्रथम केकड़ी ने दर्ज करने के दिए आदेश
केकड़ी, 10 जुलाई - तत्कालीन थानाधिकारी धोलाराम और कांस्टेबल तेजमल पर न्यायिक कार्यवाही में प्रस्तुत दस्तावेजों में छलपूर्वक कूटरचना करने और झूठी फर्द गढ़ने
Govind Vaishnav
Chief Editor
Jul 10, 2025 • 5:37 AM IST
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केकड़ी, 10 जुलाई - तत्कालीन थानाधिकारी धोलाराम और कांस्टेबल तेजमल पर न्यायिक कार्यवाही में प्रस्तुत दस्तावेजों में छलपूर्वक कूटरचना करने और झूठी फर्द गढ़ने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, केकड़ी ने अभियुक्तों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। परिवादी मोहम्मद इब्राहिम पुत्र अब्दुल मन्नान निवासी देशवाली, केकड़ी ने अधिवक्ता आसिफ हुसैन के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि उसके खिलाफ दर्ज एक मुकदमे की जांच तत्कालीन थानाधिकारी धोलाराम कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी थानाधिकारी और उनका रीडर तेजमल मकान खाली करवाने और रिपोर्टकर्ता नीरज शर्मा को कब्जा दिलवाने के लिए दबाव बना रहे थे। मना करने पर इब्राहिम को 12 सितंबर 2024 को घर से उठाकर अवकाशकालीन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहां से न्यायालय ने रिमांड अस्वीकार कर जेल भेज दिया।

परिवाद में उल्लेख किया गया कि न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेज में धोलाराम ने जानबूझकर छेड़छाड़ की और सरकारी दस्तावेज में अभियुक्त के फर्जी हस्ताक्षर जोड़कर कूटरचना की। न्यायालय ने 14 अगस्त 2024 को इब्राहिम को केंद्रीय कारागृह अजमेर से सशरीर पेश कराया। जांच में रिमांडशीट पर मौजूद हस्ताक्षरों और इब्राहिम से कोर्ट में लिए गए हस्ताक्षरों में स्पष्ट भिन्नता पाई गई। इब्राहिम ने यह भी बताया कि पुलिस हिरासत से लेकर जेल भेजे जाने तक के रास्ते में थानाधिकारी धोलाराम द्वारा उसे गालियां दी गईं। न्यायालय ने उक्त बात को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए मामले को न्यायालय की गरिमा भंग करने और सरकारी दस्तावेजों की कूटरचना का गंभीर अपराध माना। इसके साथ ही परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया कि 14 और 15 सितंबर 2024 को धोलाराम सहित 5–6 पुलिसकर्मी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कुछ गुंडों ने इब्राहिम की गैरमौजूदगी में घर के ताले तोड़कर टी.वी., फाइबर मशीन, डबल बेड आदि घरेलू सामान बाहर फेंक दिया और उसकी पत्नी व पुत्री से बदसलूकी की। वहीं घटना के वीडियो साक्ष्य भी मोबाइल से डिलीट कर दिए गए। न्यायालय ने समुचित आधार पाते हुए संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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