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जिसने जैसा किया, लौटकर वैसा ही मिलेगा जीवन में, धन व दम्भ के पीछे दौड़ना व्यर्थ -मुनि आदित्य सागर जी महाराज
केकड़ी। जीव अपनी भावनाओं से ही ऊंचा उठता है और उन्हीं से नीचा गिरता है। यदि किसी को क्रोध आ रहा है, तो समझना चाहिये कि उसमें मान या अहंकार विद्यमान है। यह भल
Govind Vaishnav
Chief Editor
Jun 05, 2024 • 6:02 AM IST
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केकड़ी। जीव अपनी भावनाओं से ही ऊंचा उठता है और उन्हीं से नीचा गिरता है। यदि किसी को क्रोध आ रहा है, तो समझना चाहिये कि उसमें मान या अहंकार विद्यमान है। यह भली भांति ध्यान रहे कि जिसने जैसा किया है, वैसा ही लौटकर उसे जीवन में अवश्य मिलने वाला है। यह बात श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने बुधवार को दिगम्बर जैन चैत्यालय भवन में ग्रीष्मकालीन प्रवचनमाला के अंतर्गत 'मेरी भावना' काव्य के सूक्तकों की व्याख्या करते हुए कही।

उन्होनें 'अहंकार का भाव ना रक्खूं, नहीं किसी पर क्रोध करूं' सूक्तक की व्याख्या करते हुए कहा कि जो नाम के पीछे दोड़ते हैं, वे मान के पीछे दौड़ते हैं। जब हमारी मृत्यु होगी, तो चाहे अमीर हो या गरीब, दो गज जमीन पर ही जलाया जाएगा, कफन भी हम नहीं ले जा सकते हैं, तो फिर व्यक्ति क्यों जीवन पर्यंत धन व दम्भ के पीछे अंधा होकर दौड़ता है। पैसा हमारी जेब में होना चाहिए, हमारे दिमाग में नहीं। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों का उपकार करते हुए यह नहीं सोचना चाहिये की बदले में हमें क्या मिलेगा।
धर्मसभा में मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने भी प्रवचन देते हुए कहा कि भावों की निर्मलता जीवन के अंदर संकल्पों और विकल्पों से निर्धारित होती है। यदि हमें भावों को सुधारना हो तो संकल्प व विकल्पों पर विराम लगाना पड़ेगा। हमारी वाणी हमारे अंतरंग का दर्पण होती हैं। हमारा चेहरा हमारे अंतरंग के भावों को दर्शाता है। एक हिरन जो की एक छोटी सी आहट से भयभीत हो जाता है, मगर वही हिरण दिगंबर मुनि को देखकर उनके समीप जाकर बैठ जाता है। उन्होनें कहा कि जो ग्रहस्थ में रहकर संयमी जीवन जीते हैं, उनके चेहरे में वृद्धावस्था में भी चमक होती है। अंतरंग के परिणाम हमारी चेष्टाओं व वचनों से झलकते हैं।

धर्मसभा के प्रारंभ में संघस्थ मुनि श्री शील सागर जी महाराज ने मंगलाचरण किया। श्रीमती विमलादेवी, मनीष व रक्षांश वेद परिवार ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया तथा शुभकामना परिवार के आचार्य ग्रुप की ओर से श्रावकों ने मुनिसंघ के पाद प्रक्षालन कर उन्हें शास्त्र भेंट किये। धर्मसभा में इंदौर, भीलवाड़ा, जयपुर व शाहपुरा से आये श्रावकों ने भी मुनिसंघ के सम्मुख श्रीफल अर्पित किए।

भक्तिभाव पूर्वक मनाया भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप व मोक्ष कल्याणक
सकल दिगंबर जैन समाज केकड़ी के तत्त्वावधान में बुधवार को निकटवर्ती ग्राम बघेरा में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पर प्रतिवर्ष की भांति तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप व मोक्ष कल्याणक भक्तिभावपूर्वक धूमधाम से मनाया गया। इसके अंतर्गत सुबह जिनेन्द्र अभिषेक, श्री शांतिनाथ पूजन विधान, शांतिधारा, निर्वाण मोदक अर्पण व आरती के धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये गए, जिनमे श्रद्धालुओ ने मंत्रोच्चारपूर्वक अर्घ्य चढ़ाए। अनुष्ठान में केकड़ी सहित चंवलेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र व बघेरा के दिगम्बर जैन धर्मावलम्बी शामिल हुए। विधान पूजन के पश्चात समाज का वात्सल्य भोज हुआ।
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