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जीवन की उलझनों का वैज्ञानिक समाधान—सुखद जीवन संस्थान की अनोखी पहल
26 अक्टूबर, चित्तौड़गढ़-सुखद जीवन संस्थान चित्तौड़गढ़ सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक स्वैच्छिक संस्थान है, जो जीवन प्रबंधन, मानसिक संतुलन, व्यक्तित्
Govind Vaishnav
Chief Editor
Oct 26, 2025 • 7:26 AM IST
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26 अक्टूबर, चित्तौड़गढ़-सुखद जीवन संस्थान चित्तौड़गढ़ सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक स्वैच्छिक संस्थान है, जो जीवन प्रबंधन, मानसिक संतुलन, व्यक्तित्व विकास और मानवीय संवेदनाओं के उत्थान के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा संचालित जीसा – जीवन से साक्षात्कार शिविर उन लोगों के लिए एक राहत का मंच साबित हो रहा है, जो तनाव, असफलता, संबंध टूटने, आर्थिक असुरक्षा, आत्मविश्वास की कमी, अनिद्रा, अवसाद या मानसिक दुविधा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह शिविर केवल प्रेरणात्मक प्रवचन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आत्म-विश्लेषण और जीवन सुधार की ठोस दिशा प्रदान करता है।
इस शिविर में आने वाले लोग अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हैं और पाते हैं कि उनकी समस्याएँ अलग नहीं, बल्कि समाज में आम हैं—बस समाधान का सही मार्ग नहीं मिल पाता। जीसा पद्धति प्रतिभागियों को यह समझने में मदद करती है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ भाग्य का खेल नहीं, बल्कि विचारों की गुणवत्ता, ऊर्जा संतुलन, कर्म पद्धति और निर्णय क्षमता की देन हैं, जिन्हें सुधारा जा सकता है। यही कारण है कि यह शिविर कई लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है और यह कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में यह एक सशक्त और कारगर सामाजिक परिवर्तन अभियान के रूप में स्थापित होगा।

सुखद जीवन संस्थान (ट्रस्ट) चित्तौड़गढ़ की ओर से रविवार को संस्थान परिसर में जीसा (जीवन से साक्षात्कार) आत्म-मंथन थेरेपी शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लेकर जीवन प्रबंधन, मानसिक संतुलन और आत्म-विकास पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संस्थान के हैप्पीनेस गुरु श्री स्थित प्रज्ञानंद (एस.डी. वैष्णव) ने संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में मनुष्य तनाव, असंतुलन और संघर्ष से घिरा हुआ है, लेकिन समस्याओं का समाधान बाहर नहीं, स्वयं के भीतर खोजने से मिलता है। जीवन की समस्याएँ विचारों से उत्पन्न होती हैं और विचार ही कर्म और परिणाम तय करते हैं। इसलिए विचारों की शुद्धता जीवन की दिशा बदल सकती है। उन्होंने कहा कि जीसा कोई प्रवचन नहीं, बल्कि जीवन को व्यवस्थित रूप से समझाने और बदलने की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पद्धति है।

शिविर में कपासन के पूर्व विधायक एवं भूमि विकास सहकारी बैंक के अध्यक्ष बद्री जाट सिंहुपर तथा जिले के कलेक्टर आलोक रंजन ने अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन शैलेश बंधवाल और हर्षा कार्णिक ने किया, जबकि समापन सत्र में गुजरात के कमिश्नर ऑफ अकाउंटेंट संजय पुंगलिया ने संबोधित किया। शिविर में प्रतिभागियों को जीवन की उलझनों जैसे पारिवारिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, व्यापार में असफलता, रिश्तों में कटुता, बच्चों में अध्ययन से अरुचि, निर्णय क्षमता की कमी, नकारात्मकता, अवसाद, भय और मानसिक अशांति जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि बार-बार समस्याएँ आना भाग्य नहीं, बल्कि विचारों और कार्यशैली की त्रुटियों का परिणाम है, जिन्हें सुधारा जा सकता है।

शिविर में जीसा के सात सिद्धांतों को विस्तार से समझाया गया, जिनमें मस्तिष्क स्पंदन सिद्धांत के माध्यम से बताया गया कि मनुष्य के विचार तरंगें नहीं, बल्कि निर्माणकारी शक्ति हैं। पंचमहाभूत सिद्धांत के अंतर्गत शरीर और प्रकृति के पांच तत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—का संतुलन जीवन के लिए अनिवार्य बताया गया। योग, ध्यान और प्राणायाम को जीवन के आवश्यक अभ्यास के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। रिश्तों के प्रबंधन में विश्वास, संवाद और भावनात्मक संतुलन की आवश्यकता बताई गई। चैरिटी के माध्यम से समाज के प्रति दायित्व निभाने का संदेश दिया गया। आजीविका सिद्धांत में उद्देश्यपूर्ण और नैतिक कमाई के महत्व पर चर्चा की गई। स्वोएल एनालिसिस के माध्यम से जीवन के मजबूत और कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने की प्रक्रिया बताई गई।

शिविर में यह भी बताया गया कि विचारों का निर्माण पाँच प्रमुख कारकों से होता है—पारिवारिक पृष्ठभूमि, निवास स्थान, संपर्क क्षेत्र, ज्ञान-और-अनुभव तथा जन्मजात क्षमता। इन्हीं से व्यक्ति की मानसिक संरचना और निर्णय क्षमता विकसित होती है। सुखद जीवन संस्थान द्वारा प्रस्तुत जीसा मॉडल इन सभी कारकों का समन्वित रूप में विश्लेषण करता है और व्यक्ति को आत्म-निरीक्षण द्वारा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग प्रदान करता है। कार्यक्रम में प्रस्तुत उदाहरणों के माध्यम से यह बताया गया कि जीसा पद्धति से अनेक जटिल समस्याओं का समाधान संभव है, जैसे 20 वर्ष की आयु तक बिस्तर गीला करने की बीमारी, अवसाद से जूझते युवाओं का आत्मविश्वास पुनः स्थापित करना, स्कूल में भय से पीड़ित बच्चों का उपचार, पारिवारिक संबंधों में सुधार और आर्थिक असफलता के बाद जीवन में पुनः संतुलन प्राप्त करना।

संस्थान द्वारा यह शिविर प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा तथा भविष्य में दैनिक सत्र भी शुरू करने की योजना है। शिविर का उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक जीवनशैली, नैतिक आजीविका और स्वस्थ पारिवारिक संरचना को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में राधेश्याम कुमावत, अमित पारीक, विकास अमरवाल, कैलाश वैष्णव, मुकेश सारस्वत सहित संस्थान के अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। अंत में संस्थान की ओर से बताया गया कि इच्छुक व्यक्ति पंजीकरण कर आगामी सत्रों में भाग ले सकते हैं और जीवन प्रबंधन की इस उपयोगी पद्धति से लाभ उठा सकते हैं।






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