केकड़ी, 14 सितंबर

हिंदू परंपराओं में परिवर्तन एकादशी यानी जल झूलनी ग्यारस का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान ठाकुरजी को बिवान में विराजित कर जल विहार के लिए ले जाया जाता है। इसी मान्यता के अनुसार, केकड़ी में भी आज ठाकुरजी को मंदिर से बिवान में निकाला गया और बड़े तालाब पर जल विहार सम्पन्न हुआ।  

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलने के समय प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं, इस अवधि में भक्तिभाव और विनयपूर्वक उनसे जो कुछ भी मांगा जाता है वे अवश्य प्रदान करते हैं। यह भी माना जाता है कि इस दिन माता यशोदा ने जलाशय पर जाकर श्रीकृष्ण के वस्त्र धोए थे,इसी कारण इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।


लेकिन, यह परंपरा इस बार प्रशासनिक लापरवाही के कारण कई समस्याओं से घिर गई। बड़ा तालाब, जो जल विहार का एकमात्र स्थान है, जल कुम्भी और गंदगी से भरा हुआ है। इस वजह से भक्तों को न केवल कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बल्कि हादसों की आशंका भी बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब की सफाई और सौंदर्यीकरण का जिम्मा नगर परिषद प्रशासन का है, लेकिन प्रशासन की कुम्भकर्णी निद्रा इस मामले में टूटने का नाम ही नहीं ले रही है।


**आखिर कब जागेगा प्रशासन?**  

तालाब की सफाई न होने के कारण घाटों पर काई जमी हुई है, जिससे कोई भी फिसल कर दुर्घटना का शिकार हो सकता है। पूरे तालाब को जल कुम्भी ने घेर लिया है। यह एक यक्ष प्रश्न है कि आस्था और परंपरा के इस महत्वपूर्ण दिन पर भी प्रशासन की अनदेखी क्यों हो रही है? लाखों रुपये अन्य मदों में खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन तालाब की दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।  


अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन कब जागता है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। अगर समय रहते सफाई और सौंदर्यीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।