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जब थानों में नहीं उड़ा गुलाल, जनता की रक्षा करने वाले ही अपने हक से वंचित
केकड़ी, 15 मार्च – जब पूरे देश में होली का जश्न मनाया जा रहा था, तब राजस्थान पुलिस के जवानों ने इस बार होली नहीं मनाने का फैसला किया। केकड़ी, सरवाड़, सावर,
Govind Vaishnav
Chief Editor
Mar 15, 2025 • 2:02 AM IST
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केकड़ी, 15 मार्च – जब पूरे देश में होली का जश्न मनाया जा रहा था, तब राजस्थान पुलिस के जवानों ने इस बार होली नहीं मनाने का फैसला किया। केकड़ी, सरवाड़, सावर, भिनाय और सदर थाना समेत कई अन्य स्थानों पर पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात रहे, लेकिन रंग-गुलाल से दूरी बनाए रखी। पुलिसकर्मियों ने वेतन विसंगति, प्रमोशन प्रक्रिया में देरी, वर्दी भत्ता, साप्ताहिक अवकाश और अन्य सुविधाओं को लेकर विरोध जताते हुए त्योहार का बहिष्कार किया।

हर साल पुलिसकर्मी होली के अगले दिन यह त्योहार मनाते थे, लेकिन इस बार उन्होंने सरकार की अनदेखी के खिलाफ अपनी परंपरा तोड़ दी। पुलिस जवानों का कहना है कि अन्य सरकारी विभागों की तुलना में राजस्थान पुलिस को वेतन और प्रमोशन में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के तहत प्रमोशन, वेतन विसंगति को दूर करने, पुलिस बल की संख्या बढ़ाने और स्थानांतरण नीति में संशोधन जैसी मांगों को लेकर पुलिसकर्मी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
आधुनिक युग में भी पुलिसकर्मियों को मात्र ₹150 प्रति माह का साइकिल भत्ता दिया जाता है, जिसे लेकर भी गहरा आक्रोश है। जवानों का कहना है कि इसके बजाय उन्हें हर महीने 10 से 15 लीटर पेट्रोल दिया जाए, ताकि वे अपने कर्तव्यों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों को मैस भत्ते के रूप में मात्र ₹2200 प्रति माह मिलता है, जो वर्तमान महंगाई के लिहाज से अपर्याप्त है। पुलिसकर्मियों को अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च कर मैस का संचालन करना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
थानों में रहने की सुविधा भी बेहद खराब स्थिति में है। केकड़ी, सरवाड़ और सावर थानों में पुलिस क्वार्टरों की स्थिति जर्जर है। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है, और मरम्मत को लेकर कई बार अनुरोध किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजस्थान पुलिस के जवान दिन-रात जनता की सेवा में लगे रहते हैं और त्योहारों पर भी अपने परिवार से दूर रहकर ड्यूटी निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी सुविधाओं की लगातार अनदेखी हो रही है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि पटवारी और कनिष्ठ लिपिक को बेहतर ग्रेड पे और प्रमोशन का लाभ मिलता है, जबकि पुलिस विभाग में यह व्यवस्था कमजोर है।
विधानसभा के बजट सत्र में भी यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी के विरोध में इस बार पुलिसकर्मियों ने होली का बहिष्कार कर सरकार को अपनी नाराजगी जताई। पुलिसकर्मियों का कहना है कि अगर जल्द उनकी मांगों को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज किया जाएगा।

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