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जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज की 70वीं पुण्यतिथि पर केकड़ी में सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन
केकड़ी, 27 सितंबर 2024: जैनाचार्य पंजाब केसरी विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज साहब की 70वीं पुण्यतिथि के अवसर पर जैन समाज ने सामूहिक आयंबिल तप करने का ऐ
Govind Vaishnav
Chief Editor
Sep 27, 2024 • 2:07 AM IST
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केकड़ी, 27 सितंबर 2024: जैनाचार्य पंजाब केसरी विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज साहब की 70वीं पुण्यतिथि के अवसर पर जैन समाज ने सामूहिक आयंबिल तप करने का ऐलान किया है। यह आयोजन 28 सितंबर, शनिवार को होगा। इस अवसर पर जैन समाज के लोगों द्वारा अपने जीवन में संयम और तप के प्रति निष्ठा प्रकट की जाएगी। इस पुण्यतिथि के अवसर पर जैन समाज ने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को स्मरण करते हुए उनके सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया है। जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज ने समाज में नशामुक्ति और स्वदेशी अपनाने के विचारों को प्रोत्साहित किया था।

महाराज साहब का जीवन प्रेरणादायक रहा है। एक वाकया याद किया जाता है, जब मुंबई में आयोजित एक धर्म सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू भी उपस्थित थे। सभा के दौरान व्यसन मुक्ति पर चल रहे भाषण के दौरान, मोतीलाल नेहरू ने "विदेशी भगाओ, स्वदेशी अपनाओ" का नारा दिया। उसी समय जैनाचार्य विजय वल्लभ जी ने उनकी जेब में रखी सिगरेट को देखकर उनसे पूछा, "यह सिगरेट देसी है या विदेशी?" इस प्रश्न से मोतीलाल नेहरू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत अपनी सिगरेट फेंक दी। उन्होंने कहा, "मैं देश की आन-बान-शान को भूल गया, लेकिन एक जैन मुनि ने मुझे याद दिलाया।
जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज न केवल आध्यात्मिक बल्कि भौतिक विकास को भी राष्ट्रधर्म के संरक्षण में ही मानते थे। उनका मानना था कि राष्ट्रधर्म का पालन करने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में राष्ट्रभक्त हो सकता है। उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार, संगठन, स्वावलंबन और सत्साहित्य के स्वाध्याय को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाया।
महाराज साहब के प्रयासों से भारत के कोने-कोने में गुरुकुल, स्कूल और कॉलेजों का निर्माण हुआ। उनका जीवन तप और त्याग की मिसाल है, और उनकी शिक्षाओं ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।इस विशेष अवसर पर जैन समाज द्वारा सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन किया गया है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भाग लेंगे। इस तप का उद्देश्य महाराज साहब के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना और उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेना है।
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