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कृष्ण जन्माष्टमी पर केकड़ी के मंदिरों में भक्तों का सैलाब, कान्हा की एक झलक का इंतजार
26 अगस्त 2024, केकड़ी-श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है, और केकड़ी शहर इस पर्व की रौनक में डूबा हुआ है। बारिश के बाद साफ-स
Govind Vaishnav
Chief Editor
Aug 26, 2024 • 11:18 AM IST
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26 अगस्त 2024, केकड़ी-श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है, और केकड़ी शहर इस पर्व की रौनक में डूबा हुआ है। बारिश के बाद साफ-सुथरे और निखरे हुए शहर के मंदिरों की सजावट मानो और भी अद्भुत हो गई है।

केकड़ी के प्रमुख मंदिरों जैसे तेलियन मंदिर, खटीकान मंदिर, बालाजी की बगीची, लक्ष्मी नाथ मंदिर, पापड़ा भेरुजी, पोकीनाड़ी बालाजी और श्री खाटू श्याम मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है। इन मंदिरों की सजावट फूलों और बिजली की झालरों से की गई है, जो रात के अंधेरे में जगमगाते हुए दिव्यता का अनुभव करा रही हैं।
हर ओर कान्हा-कान्हा की गूंज है। भक्तों के मन में बस एक ही इच्छा है—कृष्ण की एक झलक पाने की। इस उत्साह और भक्ति के माहौल में, ऐसा प्रतीत होता है कि भक्त अपने सांवले सलोने श्याम के रंग में पूरी तरह से रंग गए हैं। उनके चेहरे पर केवल मुरली-मनोहर, मदन मोहन के प्रति प्रेम और श्रद्धा का भाव झलक रहा है।
इस भक्ति की अवस्था को रसखान जैसे कवि ने अपने शब्दों में बहुत ही सुन्दरता से चित्रित किया है:
मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मै हियरा उमह्यो री,
ता दिन तें इन बैरिन कों, कहि कौन न बोलकुबोल सह्यो री।
अब तौ रसखान सनेह लग्यौ, कौउ एक कह्यो कोउ लाख कह्यो री,
और सो रंग रह्यो न रह्यो, इक रंग रंगीले सो रंग रह्यो री।*
केकड़ी के मंदिरों में कृष्ण के इस विशेष दिन का उत्सव अपने चरम पर है, और भक्तों का जनसमूह मंदिरों में दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ा है। हर कोई अपने आराध्य के सामने सिर झुकाने और उनकी एक झलक पाने के लिए आतुर है। संपूर्ण केकड़ी शहर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है।
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