21 जून, 2024 को, गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) की सर्च टीम ने कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन (धर्मार्थ ट्रस्ट) की कालेड़ा और पर्वतपुरा स्थित फैक्टरियों पर कर चोरी की शिकायत के आधार पर छापा मारा। इस छापे में भवन में ट्रस्ट सचिव मुकेश आनंद मीणा द्वारा की जा रही अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आयुर्वेदिक औषधियों को निःशुल्क सप्लाई करने के नाम पर कालेड़ा से करोड़ों रुपये की औषधियां अजमेर मंगवाकर, फर्जी बिल बनाकर बाजार में बेची जा रही थीं। इस गंभीर अनियमितता के आधार पर, विभाग ने 10 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई। छापे के दौरान, करोड़ों रुपये की कर चोरी और अन्य वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी गईं।

कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन कर्मचारी संघ ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाई है। संघ के सदस्यों ने ट्रस्ट बोर्ड के समक्ष कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया। ट्रस्ट बोर्ड ने हमेशा खुद को निर्दोष बताया और कर्मचारियों से सबूत की मांग की। लेकिन अब, जीएसटी विभाग की कार्रवाई और मौके पर ही पेनल्टी का भुगतान करने से साफ हो गया है कि ट्रस्ट बोर्ड और उसके अधिकारी खुद इस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। कर्मचारी संघ के सदस्य, संभागीय अध्यक्ष सीताराम वैष्णव और यूनियन अध्यक्ष भगवत सिंह राठौड़ ने जिला कलेक्टर श्रीमती श्वेता चौहान को ज्ञापन सौंपते हुए ट्रस्ट बोर्ड पर सख्त कार्यवाही करने की मांग की है। उन्होंने संस्थान के आय-व्यय की जांच सरकार द्वारा संचालित किसी एजेंसी से कराने की भी मांग की है। कर्मचारी संघ के सदस्य ने अपने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। संभागीय अध्यक्ष सीताराम वैष्णव ने कहा कि ट्रस्ट बोर्ड के भ्रष्टाचार और गबन के खिलाफ यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक कि दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं होती।


अब, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर जिम्मेदारी है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर उचित जांच और कार्रवाई करें। कर्मचारियों ने आशा व्यक्त की है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा। इस मामले ने न केवल कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन की साख पर सवाल उठाए हैं, बल्कि ट्रस्ट बोर्ड की विश्वसनीयता को भी चुनौती दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी सख्ती से कदम उठाता है।