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ईसरदा बांध: बीसलपुर के बोझ को घटाने वाला नया जल स्रोत, इस मानसून से जल संग्रहण की तैयारी
टोंक, 3 मई | रिपोर्ट: गोविंद वैष्णव राजस्थान में जल संकट से जूझते लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। वर्षों से पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत रहे बीस
Govind Vaishnav
Chief Editor
May 03, 2025 • 4:07 AM IST
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टोंक, 3 मई | रिपोर्ट: गोविंद वैष्णव
राजस्थान में जल संकट से जूझते लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। वर्षों से पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत रहे बीसलपुर बांध पर बढ़ते दबाव को कम करने वाला ईसरदा बांध अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए सावंत ने शनिवार को इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का निरीक्षण करते हुए इसकी 90 प्रतिशत प्रगति की पुष्टि की और इसे इस मानसून से जल संग्रहण के लिए तैयार बताया।

बीसलपुर पर दबाव, ईसरदा बना विकल्प
गौरतलब है कि 2019 में बीसलपुर बांध की स्थिति चिंताजनक हो गई थी। जल स्तर 305 आरएल मीटर तक गिर गया था, जबकि यह बांध जयपुर, अजमेर, टोंक और दौसा सहित 1 करोड़ लोगों की प्यास बुझाता है। उस वक्त विशेषज्ञों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा था — "यदि ईसरदा बांध समय पर बन जाता तो बीसलपुर पर दबाव कम हो सकता था।" यही भविष्यदृष्टि आज साकार होती दिख रही है।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता, मिशन मोड पर कार्य
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ईसरदा बांध को पेयजल आपूर्ति की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण परियोजना मानते हुए मिशन मोड में इसका निर्माण शुरू करवाया। बांध का 90% कार्य पूर्ण हो चुका है। मिट्टी के बांध का 82% हिस्सा बन चुका है, जबकि मुख्य बांध, स्पिलवे ब्रिज, पियर्स, गेट, गर्डर, एप्रेन और हाइड्रोलिक सिस्टम के अधिकांश हिस्से तैयार हैं।
पुनर्वास और भूमि आवंटन को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान भास्कर सावंत ने विभागीय अधिकारियों को कार्यों की समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण, रेलवे और वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। मौके पर उपखंड अधिकारी उनियारा शत्रुघ्न गुर्जर, अधिशाषी अभियंता विकास गर्ग, ईसरदा बांध के अधीक्षण अभियंता विजय शर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

दो चरणों में निर्माण, 1256 गांव और 6 शहर होंगे लाभान्वित
बांध का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में 256 आरएल मीटर तक 3.24 टीएमसी पानी संग्रहण की क्षमता रहेगी, जबकि बाद में यह 262 आरएल मीटर तक बढ़ाकर 10.77 टीएमसी क्षमता तक ले जाया जाएगा। यह बांध दौसा के 1079 गांव और 5 शहर, सवाई माधोपुर के 177 गांव और 1 शहर को पेयजल उपलब्ध कराएगा।
बनास नदी के जल का बेहतर प्रबंधन
ईसरदा बांध बीसलपुर के डाउन स्ट्रीम में, ग्राम बनेठा के पास बनास नदी पर बनाया गया है। यह बांध बीसलपुर के अधिशेष पानी और बनास नदी में मानसून के समय व्यर्थ बहने वाले जल का संकलन करेगा। इससे न केवल पेयजल संकट हल होगा, बल्कि पानी के प्रबंधन में भी बड़ी क्रांति आएगी।

रामजल सेतु लिंक और ईआरसीपी से भी जुड़ाव
ईसरदा बांध का उपयोग रामजल सेतु लिंक परियोजना और संशोधित ईआरसीपी योजना के माध्यम से अन्य जलस्रोतों तक पेयजल पहुंचाने में भी किया जाएगा, जिससे राज्य के और अधिक क्षेत्र लाभान्वित होंगे।
योजनाओं को चाहिए राजनीतिक इच्छाशक्ति
इस परियोजना की नींव वर्ष 2004 में रखी गई थी। 2008 में 40 करोड़, 2013 में 530 करोड़ और 2017 में 1038 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन निर्माण की गति धीमी रही। बीसलपुर की ही तरह यदि समय पर कार्य होता, तो आज स्थिति और बेहतर होती। ईसरदा बांध का निर्माण अब अंतिम चरण में है और यह बीसलपुर बांध का प्रभावी विकल्प बनकर राज्य के जल संकट को कम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाने जा रहा है। यदि इस बार मानसून सामान्य रहा, तो ईसरदा का पहला भराव इतिहास रच सकता है।

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