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ईसरदा बांध परियोजना: एक दशक की देरी, लाखों लोगों की उम्मीदें...बांध के बन जाने से बीसलपुर बांध पर दबाव कम होगा
सरकारी परियोजनाओं की धीमी गति का उदाहरण अगर कहीं देखना हो, तो टोंक जिले में बनास नदी पर बन रहे ईसरदा बांध परियोजना (Isarda Dam Project) से बेहतर कोई और नहीं
Govind Vaishnav
Chief Editor
Jul 07, 2024 • 5:08 AM IST
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सरकारी परियोजनाओं की धीमी गति का उदाहरण अगर कहीं देखना हो, तो टोंक जिले में बनास नदी पर बन रहे ईसरदा बांध परियोजना (Isarda Dam Project) से बेहतर कोई और नहीं हो सकता। इस परियोजना का उद्देश्य सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के लाखों लोगों की प्यास बुझाना है, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
कितना उपयोगी है ईसरदा बांध: बीसलपुर बांध के भराव के बाद बनास नदी में व्यर्थ बहने वाले पानी को उपयोगी बनाने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2004 में ईसरदा बांध बनवाने का निर्णय लिया गया----वर्ष 2008 में 40 करोड़ रुपये खर्च हुवे ---2013 में सरकार द्वारा 530 करोड़ का बजट आबंटन किया गया फिर वर्ष 2017 सितम्बर में लगभग 1038 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई।ईसरदा बांध इसलिए भी जरूरी है की राजस्थान देश का सर्वाधिक सूखाग्रस्त क्षेत्र है और यहाँ अकाल एक बड़ी समस्या है... बांध के बन जाने से जयपुर, सवाई माधोपुर, दौसा जिलों के लिए पानी का संकट दूर हो सकता हैं।
बीसलपुर बांध से जल आपूर्ति: ईसरदा बांध का प्रमुख जलस्रोत बीसलपुर बांध होगा। बीसलपुर बांध से पानी की निकासी होने पर यह पानी सीधे ईसरदा बांध में पहुंचेगा। इसके अलावा, बनास नदी के छोटे-बड़े बांधों का ओवरफ्लो पानी भी इस बांध को भरने में सहायक होगा। बीसलपुर बांध का कुल भराव गेज 315.50 आरएल मीटर है, जिसमें 38.70 टीएमसी पानी भरता है। यह बांध 1996 में बनकर तैयार हुआ था और तब से यह कई बार ओवरफ्लो हो चुका है।
ईसरदा बांध के बन जाने से बीसलपुर बांध पर दबाव कम होगा। इससे जयपुर, सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के लिए पानी का संकट दूर हो सकता है। जब भी बीसलपुर बांध से पानी की निकासी होगी, तो वह पानी सीधे ईसरदा बांध में जाएगा। इसके साथ ही, राजमहल से लेकर बनेठा और ईसरदा तक के सैकड़ों गांवों का बनास नदी में आने वाला पानी और क्षेत्र के छोटे-बड़े बांधों का ओवरफ्लो पानी भी इस बांध को भरने में सहायक होगा।
देरी और चुनौतियां: ईसरदा बांध परियोजना की डेडलाइन पिछले एक दशक में कई बार बदली जा चुकी है। हालांकि, मानसून के दौरान बनास नदी का पानी बीसलपुर बांध भरने के बाद ओवरफ्लो होकर बंगाल की खाड़ी में व्यर्थ बह जाता है। यदि यह पानी ईसरदा बांध में जमा हो पाता, तो लाखों लोगों की प्यास बुझाई जा सकती थी।
भविष्य की संभावनाएं: ईसरदा बांध परियोजना के पूरा होने पर सवाई माधोपुर और दौसा जिलों की जल संकट की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। साथ ही, टोंक जिले में जलस्तर में सुधार होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
ईसरदा बांध परियोजना का सफर एक दशक से अधिक लंबा हो चुका है, और यह देखना बाकी है कि अगर समय पर यह परियोजना पूरी होती है, तो सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के लाखों लोगों की प्यास बुझाने में यह बांध महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकारी प्रोजेक्ट्स की धीमी गति और बढ़ती लागतों के बीच, ईसरदा बांध परियोजना एक उदाहरण है जो दर्शाता है कि सही योजना और समयबद्धता के साथ ही विकास के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
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