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आत्म रूप की पहचान और सत्यार्थ बोध से जीवन सफल करें- मुनि अनुपम सागर महाराज
केकड़ी- मानव की जिंदगी एक प्रवेश द्वार की तरह है इसमें कितने बार प्रवेश कर लिए वापस कितनी बार इस द्वार से निकल चुके हैं आना-जाना कभी रुका ही नहीं इस परिभ्रम
Govind Vaishnav
Chief Editor
Oct 10, 2024 • 7:22 AM IST
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केकड़ी- मानव की जिंदगी एक प्रवेश द्वार की तरह है इसमें कितने बार प्रवेश कर लिए वापस कितनी बार इस द्वार से निकल चुके हैं आना-जाना कभी रुका ही नहीं इस परिभ्रमण को रोकने के लिए आत्म रूप को पहचान कर सत्यार्थ बोध प्राप्त करके परमात्मा की श्रेणी में जाने का प्रयास करना चाहिए । जीवन एक परछाई की तरह है इस कर्म रूपी परछाई को दूर करना पड़ेगा । न जाने कब पाप कर्म उदय में आ जावे और फिर पछताना पड़े। पुण्याश्रम से अपना जीवन सफल कर लेना चाहिए । संसार मायाचारी, स्वार्थी, तत्वों से भरा हुआ है । निज स्वार्थ के लिए इंसान कभी भी हद तक गुजरने में बिल्कुल देर नहीं करता है । पांडुक शिला स्थित श्री ऋषभदेव जिनालय में सत्यार्थ बोध पावन वर्षा योग के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में मुनि अनुपम सागर महाराज ने धर्मोपदेश में कहीं ।

धर्म सभा में मुनि श्री यतीन्द्र सागर महाराज ने कहा कि राष्ट्र की अखंडता के लिए जात-पात नहीं देखना चाहिए ,समाज एवं धर्म का भी ध्यान रखना चाहिए । कोई भी क्रिया हो उसे विवेक पूर्वक करना चाहिए । प्रेम वात्सल्य भाव एक दूसरे के प्रति रखना चाहिए ।प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा, दैनिक पूजन सहित धार्मिक कार्यक्रम मुनि ससंघ के सानिध्य में संपन्न किए गए । मिडिया प्रभारी रमेश जैन ने बताया कि आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट का सौभाग्य मीना शाह, राकेश, राजीव, संजीव शाह एवं प्रवीणचंद, मयंक, दीपक कासलीवाल ने प्राप्त किया।

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