केकड़ी- घटना के दुर्घटना में बचने के लिए धर्म रूपी कार्य को रिचार्ज करना चाहिए । आठ कर्म रूपी अंधकार से बचने के लिए श्रावक को अपने आठ मूल गुणो का पालन करना जरूरी है । दिगंबर साधु चलते-फिरते तीर्थ है जहां पर उनके चरण पड़ जाते हैं वह स्थान तीर्थ बन जाता है । बोहरा काॅालोनी स्थित श्री ऋषभदेव जिनालय में आयोजित धर्म सभा में अपने धर्मोपदेश में कहीं । धर्म सभा में मुनि  अनुपम सागर महाराज ने कहा कि आहार दान मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है साधना करने से साधक अपने कर्मों को नष्ट कर सकता है । देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पण भाव रखना चाहिए । प्रभु की सेवा आकांक्षा से रहित होकर भावपूर्वक पुजारी बनकर बनकर करना चाहिए । हमेशा प्रभु सिमरन से समाधि पूर्वक मरण के प्रति भाव रखें । अति शुभ कर्म का उदय होने पर समाज को साधु का चातुर्मास करवाने का फल प्राप्त होता है ।


प्रातः आचार्य श्री ससंघ का भीलवाड़ा से बिहार करते हुए नगर में प्रवेश हुआ । कोटा रोड से भेरू गेट होते हुए बस स्टैंड, अजमेरी गेट, घंटाघर मय बैंड बाजे जुलूस के साथ श्री चंद्र प्रभु चैत्यालय, पाश्र्वनाथ जैन मंदिर, श्री आदिनाथ मंदिर से श्री नेमीनाथ मंदिर पहुंचकर श्री ऋषभदेव जिनालय में दर्शन वंदना करते हुए धर्म सभा में परिवर्तित हुआ । बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के बाहर आचार्य  ससंघ एवं मुनि अनुपम सागर महाराज एवं मुनि यतीन्द्र सागर महाराज का भव्य अलौकिक मिलन हुआ । आचार्य ससंघ की भव्य अगवानी में जगह- जगह पाद प्रक्षालन एवं नेमीनाथ मंदिर में भव्यता से पाद प्रक्षालन एवं भव्य अगवानी सकल जैन समाज द्वारा की गई।


मीडिया प्रभारी रमेश जैन व पारस जैन ने बताया कि चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन सभी मन्दिरों के अधक्षों द्वारा किया गया । आचार्य  के पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान भगत सावर परिवार ने प्राप्त किया ।समाज अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि शाम को आरती भक्ति  संगीत , जिज्ञासा समाधान श्री नेमीनाथ मंदिर में हुआ । धर्म सभा का संचालन अशोक सिंहल द्वारा किया गया।