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आचार्य सुनील सागर महाराज के प्रवचनों में गुरु-शिष्य परंपरा और साधना का महत्व
केकड़ी- जब गुरू का हाथ शिष्य के सिर पर होता है तो वह बहुत बड़ा भाग्यवान होता है और पिता का हाथ पुत्र पर होता है तो वह बहुत धनवान होता है। हम पते को पता करने
Govind Vaishnav
Chief Editor
Nov 08, 2024 • 7:00 AM IST
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केकड़ी- जब गुरू का हाथ शिष्य के सिर पर होता है तो वह बहुत बड़ा भाग्यवान होता है और पिता का हाथ पुत्र पर होता है तो वह बहुत धनवान होता है। हम पते को पता करने में लग जाते है लेकिन पता मिल जाने पर अपने ध्यान साधना से सही पते पर पहुंच पाते हैं साधक को ऐसी साधना करनी चाहिए कि आसपास का वातावरण ही साध्य हो जाए । कोई भी यदि साधु के साथ चार कदम भी चल रहा है समझ लेना चाहिए वह सिद्धालय की ओर कदम बढ़ा रहा है । मन को और मान पर नियंत्रण रखना चाहिए । शब्द एक ऐसा है जिससे परिवार और समाज बंद जाता है । प्रत्येक आत्मा अनंत गुणों का गोदाम है इस कलिकाल में जन्म लेना और मरण हो जाना भी महंगा हो गया है । साधु तो चलते-फिरते तीर्थ है न जाने कब किस समय कहां किस तीर्थ धाम बन जाए। बोहरा काॅलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर परिसर में आचार्य सुनील सागर महाराज ने आयोजित धर्म सभा में अपने धर्मोपदेश में कहे।

धर्म सभा में मुनि अनुपम सागर महाराज ने कहा कि गुरु इतना देता है कि वह अपने शिष्य को धर्म संस्कार स्वरूप सर्वोच्च न्योछावर कर देता है इसे अपने आत्मोत्थान पर अक्ष पर लक्ष्य रख लेता है तो वह अपनी मंजिल पर पहुंच कर राष्ट्र धर्म की पताका का लहरा देता है । पुण्य का योग होता है तो बिगड़ते हुए काम भी सुधर जाते हैं । धर्म सभा में मुनि श्री यतीन्द्र सागर महाराज ने कहा कि मुनि अनुपम सागर महाराज के संयम दिवस गुरु के प्रति उपकार भावना दिवस है पूर्व में किए गए पुण्य कर्मों के प्रति गुरु द्वारा दीक्षा संस्कार का फल है । प्रातः आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ सरवाड़ से विहार करते हुए केकड़ी पहुचने पर आचार्य का एवं मुनि अनुपम सागर महाराज ससंघ का भव्य मिलन नगर परिषद के पास अविस्मरणीय पल की अनुभूति हुई । ससंघ मय बैंण्ड बाजे ,भव्य जुलूस के साथ अजमेरी गेट होते हुए घंटाघर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर, श्री ऋषभदेवज जिनालय से श्री नेमीनाथ मंदिर पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हुआ ।

समाज के के.सी. जैन ने बताया कि मुनि अनुपम सागर महाराज का चतुर्दश संयम साधना गुरु उपकार दिवस के रूप में आचार्य की पूजन , भक्ति एवं विनयांजली के रूप में मनाई गई । मीडिया प्रभारी रमेश जैन ने बताया कि आचार्य श्री के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन जैन समाज के श्रावक श्रेष्ठीगणों द्वारा किया गया । आचार्य सुनील सागर महाराज के पाद पक्षालन शीतल कुमार अनमोल कुमार कटारिया परिवार एवं शास्त्र भेंट अशोक कुमार, ज्ञानचंद सिंहल बघेरा परिवार ने प्राप्त किया ।समाज के महावीर मित्तल ने बताया कि अष्टानिका पर्व के अवसर पर श्री आदिनाथ मंदिर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ। दिलीप जैन ने बताया कि अनुपम सागर महाराज द्वारा रचित अनुपम कृति ‘‘पिता’’ नामक पुस्तक का विमोचन आचार्य के सानिध्य में किया गया कृति के पुण्यार्जक महावीर प्रसाद, सुशील कुमार जैन थांवला वाले परिवार ने प्राप्त किया । बाहर से पधारने वाले अहमदाबाद, देवली, किशनगढ़, सरवाड, फागी, माधोराजपुरा आदि स्थानों से धर्मावलंबीयो ने धर्म लाभ प्राप्त किया। आचार्य का शनिवार को पारा की ओर विहार होगा । धर्म सभा का संचालन के.सी. जैन एवं प्यारेलाल जैन द्वारा किया गया।
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