टोंक: राजस्थान में अवैध बजरी स्टॉक बिक्री को लेकर सीबीआई ने बजरी कारोबारी के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। शनिवार को सीबीआई ने बजरी व्यवसायी के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई जयपुर में ग्रुप के 200 फीट बाईपास स्थित ऑफिस समेत टोंक, भरतपुर, सवाई माधोपुर, नागौर, जहाजपुर और भीलवाड़ा में फैले 14 से अधिक ठिकानों पर की गई।


सीबीआई ने यह कार्रवाई लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से बजरी स्टॉक बेचने की शिकायतों के आधार पर की है। इन शिकायतों के अनुसार, लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी ग्रुप द्वारा बजरी का स्टॉक बेचा जा रहा था। इस पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे और पूछताछ की।

बनास नदी के किनारे खनन और वित्तीय अनियमितताएं

यह पहली बार नहीं है जब इस बजरी व्यवसायी पर ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इससे पहले ईडी ने बनास नदी के किनारे खनन और होटल व्यवसाय से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के लिए भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई की इस कार्रवाई से बजरी माफिया में हड़कंप मच गया है और कई माफिया इधर-उधर हो गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की रोक

गौरतलब है कि राजस्थान में बनास नदी में हो रहे लगातार कटाव को देखते हुए वहां के लोगों ने अवैध बजरी खनन को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2017 में राजस्थान में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी। मार्च 2018 को बजरी खनन के लिए सभी एलओआई समाप्त कर दिए गए थे। नवंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में बजरी खनन पर लगी रोक हटा दी, लेकिन वैध रूप से बजरी खनन अभी भी शुरू नहीं हो पाया है।

  


सीबीआई की कार्रवाई को लेकर मेघराज सिंह ने इनकार किया

इधर, राजस्थान में शनिवार को सीबीआई की रेड की बड़ी कार्रवाई को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में बजरी कारोबारी मेघराज सिंह का नाम सामने आया। इसमें बताया गया कि उनके जयपुर ऑफिस सहित 14 ठिकानों पर सीबीआई ने कार्रवाई की हैं, लेकिन इस कार्रवाई की खबरें चलने के बाद मेघराज सिंह ने एक लेटर जारी कर उनके खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई से इनकार कर दिया है। मेघराज सिंह ने पत्र में लिखा कि मेरे या मेरे किसी भी परिसर में सीबीआई की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।